श्री लोकोदय फाउंडेशन द्वारा रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित
Admin |
08 May 2026
भारत के महान कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर श्री लोकोदय फाउंडेशन द्वारा एक विशेष सांस्कृतिक एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक अंकुश सैनी ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, शिक्षा और मानवता के प्रतीक थे। उनके विचार आज भी युवाओं को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक जागरूकता और शिक्षा के उद्देश्य से किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं रवीन्द्रनाथ टैगोर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इसके बाद बच्चों द्वारा टैगोर की कविताओं, गीतों और विचारों पर आधारित प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्हें उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
संस्था के संस्थापक अंकुश सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपने साहित्य और विचारों से पूरे विश्व में भारत का गौरव बढ़ाया। उन्होंने शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं माना, बल्कि प्रकृति, कला और मानवता के साथ जोड़कर देखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को टैगोर के विचारों को अपनाने की आवश्यकता है ताकि समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे की भावना मजबूत हो सके।
उन्होंने आगे कहा कि टैगोर का जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनना है। टैगोर ने हमेशा मानवता और सामाजिक एकता को महत्व दिया। उनकी रचनाओं में देशभक्ति, प्रकृति प्रेम और समाज सुधार की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। अंकुश सैनी ने कहा कि श्री लोकोदय फाउंडेशन भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा ताकि युवाओं को महान व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा मिलती रहे।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बताया कि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने भारतीय साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी प्रसिद्ध कृति “गीतांजलि” के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे पहले भारतीय थे जिन्हें साहित्य के क्षेत्र में यह सम्मान प्राप्त हुआ। उन्होंने राष्ट्रगान “जन गण मन” की रचना कर देश को एक नई पहचान दी। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हुए शांति निकेतन की स्थापना की, जो आज विश्वभारती विश्वविद्यालय के रूप में प्रसिद्ध है।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने कहा कि टैगोर के विचार आज भी शिक्षा प्रणाली के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने बच्चों को रचनात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने पर जोर दिया। बच्चों ने भी टैगोर के जीवन से जुड़ी जानकारियाँ प्रस्तुत करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें देशभक्ति गीत, कविता पाठ और नृत्य प्रस्तुत किए गए। छात्रों ने टैगोर के साहित्यिक योगदान पर भाषण देकर लोगों को उनके जीवन से परिचित कराया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लेकर टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्री लोकोदय फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में शिक्षा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाना था। संस्था के सदस्यों ने कहा कि आज के डिजिटल युग में युवाओं को महान साहित्यकारों और विचारकों के जीवन से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम न केवल युवाओं को प्रेरित करते हैं, बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति और विरासत से भी जोड़ते हैं।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने रवीन्द्रनाथ टैगोर के विचारों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। संस्था द्वारा छात्रों को प्रेरणादायक पुस्तकें एवं सम्मान पत्र भी वितरित किए गए। समाजसेवियों ने संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंत में अंकुश सैनी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि श्री लोकोदय फाउंडेशन हमेशा शिक्षा, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करता रहेगा। उन्होंने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे महान व्यक्तित्व सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे और उनके विचार मानवता के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे।