विश्व हीमोफीलिया दिवस पर श्री लोकोदय फाउंडेशन द्वारा जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें लोगों को रक्त संबंधी इस दुर्लभ बीमारी के बारे में जानकारी दी गई और सामाजिक भागीदारी का संदेश दिया गया।
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17 Apr 2026
विश्व स्तर पर हर वर्ष 17 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व हीमोफीलिया दिवस (World Hemophilia Day) इस बार भी समाज में जागरूकता फैलाने और इस गंभीर रक्त विकार के प्रति लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से मनाया गया। इसी क्रम में श्री लोकोदय फाउंडेशन द्वारा एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया और इस बीमारी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हीमोफीलिया जैसी दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी के प्रति आम जनता में जागरूकता बढ़ाना था। हीमोफीलिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें रक्त का थक्का (clot) बनने में कठिनाई होती है। इसके कारण चोट लगने या सर्जरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता है, जो कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है। इस बीमारी के प्रति जानकारी का अभाव समाज में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसे दूर करने के लिए ऐसे अभियानों की अत्यंत आवश्यकता है।
इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान श्री लोकोदय फाउंडेशन के स्वयंसेवकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मिलकर लोगों को हीमोफीलिया के लक्षणों, कारणों और उपचार के बारे में विस्तार से बताया। लोगों को समझाया गया कि बार-बार खून बहना, मामूली चोट में भी ज्यादा रक्तस्राव होना, और जोड़ों में सूजन व दर्द जैसे लक्षण इस बीमारी के संकेत हो सकते हैं। यदि समय रहते इन लक्षणों की पहचान कर ली जाए तो मरीज को उचित इलाज देकर गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को यह भी बताया गया कि हीमोफीलिया का इलाज पूरी तरह से संभव नहीं है, लेकिन उचित देखभाल, नियमित दवाओं और चिकित्सा परामर्श के माध्यम से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। इसके लिए परिवार और समाज का सहयोग बेहद जरूरी है। इसी के साथ लोगों को यह भी प्रेरित किया गया कि वे इस बीमारी से पीड़ित लोगों के प्रति संवेदनशील रहें और उन्हें सामाजिक समर्थन प्रदान करें।
इस अवसर पर संस्था के संस्थापक अंकुश सैनी ने अपने संबोधन में कहा, “हमारा प्रयास है कि समाज के हर व्यक्ति तक स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी पहुंचे। हीमोफीलिया जैसी बीमारियां अक्सर जानकारी के अभाव में गंभीर रूप ले लेती हैं। अगर हम समय रहते जागरूक हो जाएं तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। श्री लोकोदय फाउंडेशन हमेशा ऐसे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर कार्य करता रहेगा।”
कार्यक्रम के दौरान युवाओं और स्वयंसेवकों की विशेष भागीदारी देखने को मिली। उन्होंने लोगों को जागरूक करने के लिए पोस्टर, पंपलेट और संवाद के माध्यम से संदेश फैलाया। कई स्थानों पर छोटे-छोटे समूह बनाकर लोगों को व्यक्तिगत रूप से समझाया गया, जिससे इस विषय पर बेहतर समझ विकसित हो सके। इस प्रकार की जमीनी स्तर की पहलें समाज में वास्तविक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसके साथ ही संस्था द्वारा लोगों से रक्तदान के महत्व को भी समझाया गया। हालांकि हीमोफीलिया सीधे रक्तदान से ठीक नहीं होता, लेकिन आपातकालीन परिस्थितियों में रक्त की उपलब्धता कई मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित होती है। इसलिए लोगों को नियमित रूप से रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया गया और यह संदेश दिया गया कि “रक्तदान – महादान” है।
कार्यक्रम में यह भी चर्चा की गई कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इस बीमारी के बारे में जानकारी और उपचार की सुविधा बहुत कम मिल पाती है। ऐसे में गैर-सरकारी संगठनों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे इन क्षेत्रों में जाकर जागरूकता फैलाएं और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाएं। श्री लोकोदय फाउंडेशन ने इस दिशा में निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया है।
इस आयोजन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही एक स्वस्थ समाज की नींव है। यदि समाज का हर व्यक्ति स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को गंभीरता से ले और समय-समय पर जांच करवाए, तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। हीमोफीलिया दिवस जैसे अवसर हमें यह याद दिलाते हैं कि हमें न केवल अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए, बल्कि दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।
अंत में, सभी प्रतिभागियों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि वे समाज में जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए हमेशा आगे रहेंगे। श्री लोकोदय फाउंडेशन का यह प्रयास निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।