डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर श्री लोकोदय फाउंडेशन ने किया भव्य एवं प्रेरणादायक आयोजन
Ankush Saini |
14 Apr 2026
समाज में समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के मूल्यों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से श्री लोकोदय फाउंडेशन द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करने का माध्यम बना, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट कर उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास भी सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजसेवी, युवा, महिलाएं, छात्र-छात्राएं एवं स्थानीय नागरिकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। आयोजन स्थल को आकर्षक रूप से सजाया गया था, जहां बाबा साहेब के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक उद्धरणों और चित्रों के माध्यम से उनके विचारों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई, जिससे वातावरण पूरी तरह श्रद्धा और सम्मान से भर गया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बाबा साहेब के जीवन संघर्ष, उनके अदम्य साहस, शिक्षा के प्रति उनके अटूट समर्पण और भारतीय संविधान निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे एक साधारण परिवार में जन्म लेकर उन्होंने अपने अथक प्रयासों से उच्च शिक्षा प्राप्त की और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि बाबा साहेब के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, विशेषकर तब जब समाज में अभी भी कई स्तरों पर असमानता और भेदभाव देखने को मिलता है।
श्री लोकोदय फाउंडेशन के संस्थापक अंकुश सैनी ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा, “डॉ. अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं। उन्होंने हमें सिखाया कि शिक्षा, संगठन और संघर्ष के माध्यम से हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। आज के समय में हमें उनके विचारों को केवल याद ही नहीं करना है, बल्कि उन्हें अपने जीवन में अपनाना भी है।” उन्होंने आगे कहा कि संस्था निरंतर समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए कार्यरत है और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता फैलाती रहेगी।
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेष रूप से शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, बाल विकास और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन जैसे विषयों पर चर्चा की गई। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि जब तक समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर नहीं मिलेगा, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे अपने स्तर पर समाज सुधार के प्रयासों में भाग लें और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए आगे आएं।
इस अवसर पर बच्चों और युवाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिनमें निबंध लेखन, भाषण प्रतियोगिता, सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी एवं चित्रकला प्रतियोगिता शामिल थीं। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य युवा पीढ़ी को बाबा साहेब के विचारों से जोड़ना और उनमें सामाजिक चेतना का विकास करना था। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ भाग लिया और अपने विचारों के माध्यम से बाबा साहेब के आदर्शों को प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़े जागरूकता सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों द्वारा लोगों को महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को आवश्यक सामग्री जैसे पुस्तकें, स्टेशनरी एवं अन्य उपयोगी वस्तुएं वितरित की गईं। यह पहल समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संस्था की संवेदनशीलता और समर्पण को दर्शाती है।
महिलाओं की विशेष भागीदारी भी इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता रही। महिलाओं ने न केवल कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया, बल्कि अपने विचारों को भी खुलकर व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के प्रयासों के कारण ही आज महिलाओं को शिक्षा और अधिकारों के क्षेत्र में समान अवसर प्राप्त हो सके हैं। उन्होंने संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार साझा किए और बाबा साहेब के सिद्धांतों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को विशेष रूप से जागरूक होने की आवश्यकता है, ताकि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा ही वह सबसे शक्तिशाली माध्यम है, जो किसी भी व्यक्ति के जीवन को बदल सकता है।
कार्यक्रम के दौरान समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे छुआछूत, भेदभाव, अशिक्षा और गरीबी पर भी गंभीर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि इन समस्याओं को समाप्त करने के लिए केवल सरकार के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे अपने आसपास के लोगों को शिक्षित करने और जागरूक करने का प्रयास करें।
श्री लोकोदय फाउंडेशन के स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे समर्पण और उत्साह के साथ कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को संभाला और यह सुनिश्चित किया कि सभी प्रतिभागियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। संस्था के इस प्रयास ने यह साबित कर दिया कि जब समाज के लोग मिलकर काम करते हैं, तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करना संभव हो जाता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे बाबा साहेब के विचारों को अपने जीवन में अपनाएंगे और समाज में समानता, शिक्षा और भाईचारे को बढ़ावा देंगे। उन्होंने यह भी प्रतिज्ञा ली कि वे समाज के कमजोर वर्गों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहेंगे और एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान देंगे।
समापन समारोह में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस दौरान सभी प्रतिभागियों के उत्साह और प्रतिभा की सराहना की गई। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिससे पूरे वातावरण में देशभक्ति और एकता की भावना और भी प्रबल हो गई।
यह आयोजन न केवल बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक माध्यम बना, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुआ। श्री लोकोदय फाउंडेशन द्वारा किया गया यह प्रयास निश्चित रूप से समाज के विभिन्न वर्गों को प्रेरित करेगा और उन्हें एक बेहतर, समान और सशक्त समाज के निर्माण के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।