समाज में फैली कुरीतियाँ और अभाव: एक गंभीर चुनौती, जागरूकता ही समाधान का मार्ग
Ankush Saini |
13 Apr 2026
आज के आधुनिक और प्रगतिशील युग में जहां विज्ञान, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर विकास हो रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज के एक बड़े हिस्से में आज भी कई कुरीतियाँ और अभाव गहराई से जड़ें जमाए हुए हैं। यह एक विडंबना है कि विकास की इस दौड़ में भी समाज का एक वर्ग आज भी मूलभूत सुविधाओं और समान अवसरों से वंचित है।
समाज में फैली कुरीतियों में प्रमुख रूप से अशिक्षा, बाल श्रम, दहेज प्रथा, लैंगिक भेदभाव, जातिवाद और अंधविश्वास जैसी समस्याएँ शामिल हैं। ये कुरीतियाँ न केवल सामाजिक विकास में बाधा बनती हैं, बल्कि मानवता के मूल्यों को भी कमजोर करती हैं। आज भी कई ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में बाल श्रम एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जहां छोटे-छोटे बच्चे शिक्षा प्राप्त करने के बजाय मजदूरी करने को मजबूर हैं। यह न केवल उनके भविष्य को अंधकारमय बनाता है, बल्कि देश के समग्र विकास को भी प्रभावित करता है।
दहेज प्रथा जैसी कुरीति आज भी समाज में अपनी जड़ें जमाए हुए है, जिसके कारण अनेक परिवार आर्थिक और मानसिक संकट का सामना करते हैं। कई बार यह प्रथा महिलाओं के उत्पीड़न का कारण भी बनती है, जो एक अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। इसके साथ ही, लैंगिक भेदभाव भी एक बड़ी समस्या है, जहां आज भी कई स्थानों पर बेटियों को शिक्षा और अवसरों से वंचित रखा जाता है।
अंधविश्वास और रूढ़िवादी सोच भी समाज के विकास में एक बड़ी बाधा है। कई लोग आज भी वैज्ञानिक सोच को अपनाने के बजाय पुराने मिथकों और गलत धारणाओं पर विश्वास करते हैं, जिससे सामाजिक प्रगति रुक जाती है। आवश्यकता है कि समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक सोच को बढ़ावा दिया जाए।
अभाव की बात करें तो आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और शिक्षा के अभाव से जूझ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण छोटी-छोटी बीमारियां भी गंभीर रूप ले लेती हैं। शिक्षा का अभाव भी एक बड़ी समस्या है, जिससे लोग अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक नहीं हो पाते।
शहरी क्षेत्रों में भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोग आज भी स्वच्छ पानी, साफ-सफाई और उचित आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। बेरोजगारी के कारण युवा वर्ग निराशा का शिकार हो रहा है, जिससे अपराध दर में भी वृद्धि देखने को मिलती है।
इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए सबसे महत्वपूर्ण है जागरूकता और शिक्षा। जब तक समाज का हर व्यक्ति शिक्षित और जागरूक नहीं होगा, तब तक इन कुरीतियों और अभावों से मुक्ति पाना संभव नहीं है। सरकार के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों को भी इस दिशा में आगे आना होगा।
श्री लोकोदय फाउंडेशन जैसे संगठन इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। यह संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रही है। संस्था द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिविर और सहायता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके।
समाज में परिवर्तन लाने के लिए यह आवश्यक है कि हम सभी मिलकर इन कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाएं और एकजुट होकर कार्य करें। प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर प्रयास करना होगा—चाहे वह शिक्षा को बढ़ावा देना हो, बेटियों को समान अवसर देना हो या अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाना हो।
इसी संदर्भ में श्री लोकोदय फाउंडेशन के संस्थापक अंकुश सैनी जी ने बताया कि “हम सब साथ मिलकर ही समाज में फैली इन कुरीतियों और अभावों को दूर कर सकते हैं। जब तक समाज का हर व्यक्ति जागरूक नहीं होगा, तब तक परिवर्तन संभव नहीं है। शिक्षा और एकजुटता ही वह शक्ति है, जो समाज को नई दिशा दे सकती है।” उन्होंने आगे कहा कि “हर व्यक्ति को अपने स्तर पर आगे आकर जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रयास करना चाहिए। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर एक बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।”
अंततः, एक सशक्त और विकसित समाज का निर्माण तभी संभव है, जब हम कुरीतियों को त्यागकर समानता, शिक्षा और मानवता के मार्ग पर चलें। यह केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हम सभी का कर्तव्य है कि हम एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।